चलो बताओ कौनसी कहानी सुनाओगे कोई नई पेश होगी या फिर पुराणीवाली दोहराओगे कुछ दिन शुरू के रोज़ बातें होंगी फिर दिन लम्बे काम के और रातें घर वालों के नाम होंगी वह नाजुक से पल जब दिल धड़का था किसी डायरी में कर देंगे कैद उन्हें फिर किताबों में छुपी शायरी लब्ज़ दर लब्ज़…